ऐ जिंदगी.....
ऐ जिंदगी तुझसे फुरसत क्या मांग ली
तूने तो मुझसे मेरी काबिलीयत छीन ली
बरसो से जो चाहता था
वह एक साल में ही दे दिया
पहले घर पे सुकून से बैठने के लिये तरसता था
अब आशियाने को बचाने के कोशिश में परेशान हूं
तब बच्चो की हंसी देखने के लिये तरसता था
अब बच्चो की जरुरतो को पूरा करने की खयाल से जुझता हू
हर तरफ अंधेरा सा दिखता है
किसी ओर से उजाले की एक झलक को तरसता हू
टूट ही जाता हूं अंदर से जब
उम्मीद पे दुनिया कायम है
यह सोचके फिर खडा हो जाता हूं
तू चाहें जितना सता ले ऐ जिंदगी
अंधेरा तो उजाले का हाथ थामकर ही आता है
कांच की तरह टूट कर बिखर गया भी तो क्या
अपना अक्स उन टुकडो से समेटना भी
मुझे आता है
ऐ जिंदगी अब तू संभल जा
मैं कभी हार के बैठा नहीं हूं
तेरे दामन के काटे चुभे जरुर
पर मै अभी जख्मी नही हूं
कुछ देर फुलो के साथ काटो को
छू भी लिया तो क्या
बस जरासा सहमा हूं
लहूलुहान नही हूं
तूने मुझे चुनौतियों से कुछ ऐसा निखारा
मैने मेरी कमजोरी को काबिलियत में बदल डाला
©️ प्राजक्ता ठोंबरे
३१/१२/२०

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ReplyDeleteDhanyavad 🙏
Deleteयथार्थ
ReplyDeleteDhanyavad tai
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